मानव शरीर से चार्ज हो सकता है मोबाइल
आपके पास मोबाइल फोन है, नेटवर्क भी ध्वस्त नहीं है फिर भी बात नहीं हो पा रही है तो क्या कारण हो सकता है? या तो हैन्डसेट खराब है या फिर मोबाइल की बैटरी डिस्चार्ज हो गयी है। हैंडसेट की खराबी तो मोबाइल कम्पनी वाले दूर करेंगे पर अगर बैटरी खत्म हो गई है तो मोबाइल को अपनी बगल में दबा लीजिये और 'हेलो' कहिये-शायद बात हो जाये। पर पहले यह खबर तो पढ़ लीजिये जो हिंदी दैनिक हिंदुस्तान के २९ मई के लखनऊ संस्करण में संदीप रिछारिया कि मार्फत छपी:-
कहते हैं आवश्यकता अविष्कार की जननी होती है । पर चित्रकूट के अब्दुल मुबीन सिद्दीकी को अविष्कार करने के लिए आवश्यकता की नहीं बल्कि विषय मात्र की आवश्यकता थी। मौका मिला और इस युवक ने अपनी प्रतिभा का छोटा सा नमूना दुनिया के सामने रख दिया है। खिलौने खेलने की उम्र में ही पेंचकस और प्लास पसंद करने वाले अब्दुल मुबीन सिद्दीकी ने शरीर के द्वारा मोबाइल फोन चार्ज करने वाले यंत्र का अविष्कार कर साधन और सुविधाओं का रोना रोने वालों के सामने अपनी नवीन शोध के रूप में चुनौती पेश कर दी है।
किसी भी कम्पनी के मोबाइल फोन को शरीर से चार्ज करने का दावा करने वाले सिद्दीकी कहते हैं कि कानपुर से लखनऊ की यात्रा के दौरान जब उन्हें अपने परिचितों -परिजनों से मोबाइल फोन के द्वारा बात करने की आवश्यकता महसूस हुई तो बैटरी डिस्चार्ज मिली। इलेक्ट्रानिक्स में गहरी दिलचस्पी रखने वाले मुबीन ने उसी दिन से शरीर से चार्ज होने वाले मोबाइल फोन के बारे में सोचकर ताना-बाना बुनना प्रारम्भ कर दिया। शुरुआती दौर में असफलताएं हाथ लगीं।समय बीतता गया ,अपनी धुन के पक्के मुबीन इस खोज में लगे रहे।लगभग दो वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद बीते १८ अप्रैल की रात दो बजकर बीस मिनट पर नोकिया के हैन्डसेट को यंत्र द्वारा चार्ज होते देख मुबीन एक बार तो खुशी के मारे पागल से हो गये। खुशी के मारे उनकी आँखें आंसुओं से भर गईं। घर और मोहल्ले वालों को जब मुबीन के नए शोध की जानकारी मिली तो पूरे मोहल्ले में उत्सवी माहौल छा गया। सुबह होते-होते बधाइयों का ताँता लग गया।
अपने नये अविष्कार को लेकर मुबीन महात्मा गांधी चित्रकूट गामोदय विवि के इलेक्ट्रानिक्स संकाय के प्रमुख प्रो. अवध श्रीवास्तव के पास पहुँचे। डा. अवध श्रीवास्तव ने उसे जाँच परखकर जन उपयोगी नवीन शोध कर लेने पर बधाई दी। साथ ही उसे चार्जिंग यंत्र का आकार छोटा करने को कहा। अपने नवीन शोध की जानकारी देने मुबीन जिलाधीश रंजन कुमार के पास पहुँचा। आई.आई.टी. कानपुर के छात्र रहे व इलेक्ट्रानिक्स में गहरी दिलचस्पी रखने वाले जिलाधिकारी ने मोबाइल चार्जिंग यंत्र का विधिवत परीक्षण कर अब्दुल मुबीन सिद्दीकी को उनकी नई खोज के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह जन उपयोगी यंत्र आने वाले समय में अत्यधिक लोगों द्वारा प्रयोग किया जा सकता है।
इस यंत्र के अविष्कारक अब्दुल मुबीन सिद्दीकी सिलसिलेवार पूरी जानकारी देते हैं। वह बताते हैं कि थर्मामीटर के सिद्धान्त पर उनका यंत्र बना है। यंत्र के निर्माण में मर्क का सिद्धान्त उपयोग में लाया गया।इस यंत्र को हाथों में दबाकर ढाई घंटे में व काँख में दबाने पर डेढ़ घंटे में पूरी तरह चार्ज किया जा सकता है। मुबीन कहते हैं कि इस यंत्र के उपयोग में किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। कहा है कि इस खोज की बात सुनकर कुछ बड़ी मोबाइल कम्पनियों के प्रतिनिधियो द्वारा उनसे सम्पर्क साधने का प्रयास किया गया। पर बड़ी कम्पनियों के बारे में अपनी राय बेबाकी से रखने वाले मुबीन कहते हैं कि इस शोध को वह स्वयं पेटेन्ट करायेंगे। मुबीन की ख्वाहिश है कि उनकी इस खोज से कम पैसे में अच्छी चीज बाजार में आये।
अब देखना है कितना उपयोग हो सकता है इस खोज का। वैसे जहाँ बिजली रहती है वहाँ के लोग तो डे़ढ घंटे अपनी काँख में मोबाइल दबाने से रहे। हाँ यह वहाँ के लिये उपयोगी है जहाँ मोबाइल फोन है,नेटवर्क है पर बिजली या तोनदारत रहती है या नखरे करती है।


