हिमनादों का पिघलना
वैज्ञानिकों ने बताया है कि भारत के प्राचीन हिमनाद यानी ग्लेशियर इस सदी के अंत तक पिघल सकते हैं। ये वो हिमनाद हैं जिनसे कि गंगा नदी में पानी आता है। और अगर वैश्विक तापमान में वृद्धि अनुमान से ज़्यादा होती है तो ये और जल्दी हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार वैश्विक तापमान में वृद्धि का कारण कार्बन डाइ ऑक्साइड व अन्य गैसों का अत्यधिक मात्रा में उत्सर्जन है। ये जैसें सूरज की गर्मी को अपने अंदर रखती हैं और इससे पृथ्वी और वातावरण दोनों गर्म रहते हैं। इससे भारत के साथ नेपाल, पाकिस्तान और बाङग्लादेश भी प्रभावित हो सकते हैं।
हिमनादों का पिघलना एक चिन्ता का कारण है क्योंकि इससे लाखों करोड़ों किसानों व उनसे जुड़े अन्य लोगों की रोज़ी रोटी प्रभावित होगी, ऐसे लोग जो कि कृषि पर निर्भर हैं। हालांकि कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जन का अधिकांश भाग अमेरिका व चीन द्वारा उत्सर्जित किया जाता है, भारत भी पीछे नहीं है। भारत में टैम्पो जैसे कुख्यात वाहन इस समस्या को और विकराल बना रहे हैं। तापमान बढ़ने के साथ साथ धूलकणों और गैसों को श्वास के द्वारा अन्दर लिये जाने पर हृदय सम्बन्धी बीमारियां भी बढ़ेंगी।
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1 Comments:
क्षमा चाहती हूं लेकिन एक बहुत बड़ी त्रुटि इस ख़बर में है। सही शब्द "हिमनद" है "हिमनाद" नहीं। नाद का अर्थ स्वर होता है, नद का अर्थ छोटी नदी।
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