मंगलवार, जून 21, 2005

पेट्रोल का संभावित विकल्प

नवभारत में प्रकाशित खबर के अनुसार गोरखपुर स्थित गोविंद गौशाला के संस्थापक न्यासी प्रह्लाद ब्रह्मचारी का काम गोबर गैस से कार्बन डाइ आक्साइड और मीथेन गैसों को अलग करके पेट्रोल का एक विकल्प, बोतलबंद मीथेन, तैयार कर देगा और इस विकल्प की कीमत पेट्रोल की आधी है। सच में यदि ये सफल रहा तो ऐसा बहुत ही अच्छा होगा हमारे देश के लिये। नीचें पढ़ें विस्तार से:

पेट्रोल से आधी कीमत पर तैयार ईंधन से दौड़ेंगी कारें

लखनऊ (भाषा): हो सकता है आने वाले समय में पेट्रोल से आधी कीमत पर तैयार ईंधन से कारें दौड़ने लगें और देश में दूध की नदियां बहने लगें! इस सपने को सच बनाने का प्रयास कर रहे हैं, गोरखपुर स्थित गोविंद गौशाला के संस्थापक न्यासी प्रहलाद ब्रह्मचारी। अपने सहयोगियों की मदद और अदम्य लगन से उन्होंने अपनी गौशाला में गोबर गैस से कार्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन को अलग करके मीथेन की बाटलिंग प्रणाली विकसित की है।

मीथेन की बाटलिंग का यह प्रयोग अगर सफल रहा, तो इससे देश में एक आर्थिक क्रांति आ सकती है। गाय-भैंसें कामधेनु बनकर देहातों को स्वर्ग बना सकती हैं और कारें पेट्रोल से आधी कीमत पर प्रदूषण मुक्त ईंधन के सहारे दौड़ सकती हैं। गोबर गैस में 65 फीसदी मीथेन, 34 फीसदी कार्बन डाई ऑक्साइड और एक फीसदी हाइड्रोजन सल्फाइड होता है। ब्रह्मचारी के मुताबिक, हालांकि बाटलिंग रासायनिक तरीके से भी संभव है, मगर उन्होंने इसके लिए 'क्रायोजनिक सुपर कूलिंग प्रणाली' अपनाई। ऐसा करने में मीथेन तो अलग हुआ ही, कार्बन डाई ऑक्साइड जमकर सूखी बर्फ बन गई, जिसका रेफ्रीजिरेशन में व्यावसायिक और बहुआयामी उपयोग होता है। उन्होंने बताया कि एक किलो मीथेन से पुरानी मारुति वैन भी 25 किलोमीटर तक चल जाती है, जबकि थ्री व्हीलर 40-45 किलोमीटर तक चल सकता है।

वैसे, ब्रह्मचारी कोई इंजीनियर नहीं, सिर्फ कॉमर्स ग्रेजुएट हैं। उनका सपना था कि वह अपनी गौशाला को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएं और इसी वजह से उन्होंने गोबर गैस की बाटलिंग की ठानी। वह दो साल तक इंटरनेट और केमिस्ट्री की किताबें छानते रहे। इस सिलसिले में वह आईआईटी दिल्ली भी गए। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। अब वह अपनी गौशाला में बने 45 क्यूबेक मीटर क्षमता के गोबर गैस संयंत्र से प्रतिदिन 4 किलोग्राम क्षमता के चार सिलिंडर भर रहे हैं। बाटलिंग की पूरी प्रक्रिया अपनाने में औसत 5 रुपये प्रति किलोग्राम खर्च उन्हें आ रहा है। उनके गौशाला में इंपोर्ट किया हुआ कंप्रेसर युक्त प्लांट 400 वर्ग फुट से कम के ही क्षेत्रफल में बना हुआ है। उन्होंने बताया कि कम लागत पर मीथेन बाटलिंग का काम व्यावसायिक स्तर पर किया जा सकता है।

4 Comments:

At 5:57 अपराह्न, Blogger अनूप शुक्ला said...

यह खबर तो बहुत खुशनुमा है। देखो कितना कार्यान्वित हो पाती है।मंहगा-सस्ता तो बाद की बात है,पहले तो विकल्प बनने चाहिये।

 
At 7:31 पूर्वाह्न, Blogger Atul Arora said...

कुछ इसी तरह के प्रयोग की खबर पड़ी थी जिसमें गमलो में गोबर या बेकार पड़ी कार बैटरी से की सहायता से गाँव मे लोग स्वदेश बना रहे हैं यानि की बल्ब जला रहे हैं।

 
At 4:25 पूर्वाह्न, Blogger Varun Singh said...

आपके प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाये, कम है.
यदि मैं इस में कुछ योगदान कर सकूं तो मेरे लिये यह गर्व का विषय होगा.
Let me know. Mail me at vasingh@gmail.com

 
At 3:19 अपराह्न, Blogger Mrs. Asha Joglekar said...

ये विग्यान वाला पन्ना पहली बार जेखा पेट्रोल का विकल्प मिल गया है पढ कर बडा अचछा लगा । जल्दी ही इस प्रयोग को और कामयाबी मिले ।

 

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