शून्य की महत्ता
अभी कुछ समय पहले एक पुस्तक पढ़ रहा था "Against the Gods: The Remarkable Story of Risk" कहानी है आदमी ने कैसे सामान्य जीवन से जुड़े खतरों को बस में करने शुरु किया। वे खतरे जिन्हें पहले जो भगवान को मंजूर कह कर आदमी कुछ नहीं करता था। मजे की बात है इस बारे में सबसे पहले लोगों ने पासे की अगली चालों पर आने वाले अंको के बारे में जानकारी के लिए प्रयोग करना शुरु किया था। लेखत श्री पीटर बर्नस्टीन बताते हैं कि खतरों को बस में करने का मानव का सबसे पहला कदम भारतीय-अरबी अंक प्रणाली की खोज थी। इस से पहले दूसरी अंक प्रणालियों में सामान्य गणित का जमा घटा बहुत मुश्किल था। सोचिए यदि आप को रोमन के XXXIX और MC को गुणा करना पड़े। इस भारतीय अंक प्रणाली की खोज में भी सबसे बड़ा फंडा था शून्य की खोज।
शून्य की खोज की महत्ता से जुड़े और बहुत से तथ्य हैं पर जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित किया वह थी पहली बार किसी ने abstract thinking की। शून्य का वैसे जीवन में क्या स्थान है। आप शून्य किलो आटा नहीं ला सकते। शून्य मील चला नहीं जा सकता। लेकिन महीषियों ने इस बारे में सोचा। यह मानव की सोच के लिए एक बहुत बड़ी छलांग थी। कभी मौका मिले तो यह पुस्तक अवश्य पढ़िएगा। बड़े रोचक तरीके से लिखी गई है।


2 Comments:
काफ़ी रोचक है!
जानकारी तो अच्छी है पर किताब पता नहीं कब मिले पढ़ने को तो जरा जानकारी दे दो भाई क्या सोचते थे मुनिगण.
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