पनबिजली और प्रदूषण
ज्यादातर लोग ये सोचते हैं कि पनबिजली कोयले या किसी और जीवाश्म ईंधन से बनायी गयी ऊर्जा की अपेक्षा कम प्रदूषण पैदा करती है। पर हाल में किये गये एक शोध के अनुसार ये सहीं नहीं हो सकता है। इसका कारण है कि जब काते गये पेड़ों का तालाबों में क्षय होता है तो इस प्रक्रिया से काफ़ी मेथेन गैस उत्पन्न होती है जो कि औद्योगिक या जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से बनायी जाने वाली ऊर्जा से कहीं ज़्यादा होती है। इसका कारण है पेड़ों में अत्यधिक कार्बन का होना। इसके अलावा मानव निर्मित इस तालाबों के कारण वातावरण की कार्बन डाइ ऑक्साइड गैस भी मेथेन में परिवर्तित हो जाती है। गौरतलब है कि मेथेन का दुश्प्रभाव कार्बन डाइ ऑक्साइड की तुलना में २१ गुना ज़्यादा होता है।
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