तीसरी आंख
शंकर जी की तीसरी आंख के बारे में शायद हम सब जानते हैं और हमको ये भी मालूम है कि किस तरह उन्होंने अपनी इसी आंख से प्रेम में लीन कामदेव को भस्म कर दिया था। अब यदि कोई यदि आपसे कहे कि हर प्राणी के एक तीसरी आंख होती है तो आप क्या सोचेंगे? शायद चौंक जायेंगे। राजस्थान में डूंगरगढ़ विश्वविद्यालय के प्राणि एक युवा वैज्ञानिक डॉक्टर ओ पी जांगीड़ ने इस तीसरी आंख का सफलता से विकास करके नेत्रहीनों का जीवन रोशन करने का एक सफल प्रयोग किया है। डॉ जांगीड़ कहते हैं, 'जीव विज्ञान में मान्यता है कि निम्न कोटि के अनेक पृष्ठवंशियों जैसे प्लेकोडर्म, पेटोमाइजोन, और स्फ़ेडॉन आदि में सामान्य दो आंखों के अलावा मध्यपृष्ठ सतह पर एक तीसरी आंख भी पायी जाती है। यह आंख मस्तिष्क के डॉयनइनसेफोलीज भाग से सामान्य आंखों की तरह ही जुड़ी रहती थी यानी इसका संबन्ध भी मस्तिष्क से ही रहा है। किंतु विकास के साथ साथ आंखों की स्थिति भी परिवर्तित हुई और आंखें पार्श्व स्थिति में चली गयीं। इसके फलस्वरूप तीसरी आंख की उपयोगिता समाप्त होती गयी और धीरे धीरे लुप्त हो गयी। ' ।
विस्तृत जानकारी के लिये यहां पढ़ें।
सावधान, पढ़ के आप किसी को किसी को भस्म करने के बारे में मत सोचिये!


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