शुक्रवार, अगस्त 15, 2008

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चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

रविवार, अगस्त 21, 2005

बोस-आइंस्टाइन सिद्धांत की मूल प्रति मिली


बोस और आइंस्टाइन के सिद्धांत पर नोबेल पुरस्कार समिति की वेबसाइट का पन्ना नीदरलैंड में एक छात्र ने अल्बर्ट आइंस्टाइन के हाथ के लिखे कुछ अनमोल पन्ने ढूँढ निकाले हैं जो उन्होंने भारतीय वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस के साथ मिलकर किए गए शोध के दौरान लिखे थे।

नोबेल पुरस्कार की वेबसाइट का कहना है कि भारतीय वैज्ञानिक बोस ने प्रकाश के मूल तत्व फोटोन के बारे में गहन शोध किया था। उन्होंने अपना शोध आइंस्टाइन को भेजा था जिससे वे बहुत प्रभावित हुए और बोस के शोध पत्र का ख़ुद जर्मन में अनुवाद किया और उसे एक प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित कराया। बोस के इस सिद्धांत को आइंस्टाइन ने और आगे बढ़ाया और उन्होंने न सिर्फ़ प्रकाश बल्कि अन्य पदार्थों के अणुओं का भी अध्ययन उसमें जोड़ दिया।

आइंस्टाइन-बोस सिद्धांत का कहना था कि शून्य से काफ़ी नीचे के तापमान पर गैस के अणु अपनी ऊर्जा पूरी तरह खो देते हैं और वे एक नई अवस्था में चले जाते हैं जहाँ एक अणु को दूसरे से भिन्न करना संभव नहीं रहता।

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गुरुवार, अगस्त 11, 2005

आलिंगन और स्वास्थय

अब वैज्ञानिकों ने भी ये पता लगाया है कि आलिंगन स्वास्थय के लिये लाभदायक है, ख़ासतौर पर उच्च रक्तचाप और दिल की बीमारियों के लिये।

ये भी पाया गया है इसका असर महिलाओं पर ज़्यादा होता है। अमरीका के नॉर्थ कैरोलाइना विश्वविद्यालय में किए गए एक अध्ययन के अनुसार आलिंगन से ऑक्सीटोसिन नाम के एक हार्मोन में बढ़ोत्तरी होती है जो इन बीमारियों से बचाता है। विश्वविद्यालय ने अड़तीस दम्पत्तियों पर शोध करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला।

अब मुन्नाभाई एमबीबीएस में दिखाई गयी जादू की झप्पी तो वैज्ञानिक तथ्य हो गई है इसलिये उन लोगों को तो अब ये स्वीकरना ही पड़ेगा जिन्होंने फ़िल्म देखने के बाद इसको हंसी समझ के उड़ा दिया था।

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गाने और सॉफ़्टवेयर

खबर है कि पंजाब इन्जीनियरिंग कालेज के छात्रों ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया है जिसके ज़रिये किसी भी रेडियो स्टेशन के फिल्मी संगीत के कार्यक्रम सीधे लोगों तक प्रसारित किये जा सकते हैं।

इंजीनियरिंग के तीसरे वर्ष के इन छात्रों, कंगन अरोड़ा, भावना राय, सौम्य जैन, अतुल गुप्ता और साधना नागपाल का दावा है कि उनके 'म्यूजिक ऑन डिमांड' नाम के सॉफ़्टवेयर से कोई भी रेडियो प्रोड्यूसर कुछ ही पलों में किसी भी श्रोता की फ़रमाइश का गीत ढ़ूंढकर प्रसारित कर सकता है। इस प्रक्रिया की मदद से फ़रमाइशी संगीत के कार्यक्रमों को पहले से रिकॉर्ड करने की ज़रूरत नहीं रह गई है।

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मंगलवार, अगस्त 09, 2005

डिस्कवरी सकुशल वापस लौटा

डिस्कवरी सकुशल वापस लौटा
नासा का अंतरिक्ष यान डिसकवरी, अपनी यात्रा पूरी करके सकुशल वापस पहुँच गया. दुनिया भर के लोगो की निगाहे इसके सकुशल वापस लौटने पर थी. आपके ज्ञात होगा, डिसकवरी की पिछली उड़ान से वापस आते वक्त सात अंतरिक्ष यात्रियों जिसमे भारत की कल्पना चावला भी थी, की मौत हो गयी थी.

नासा ने डिसकवरी के सकुशल पहुँचने पर राहत की सांस ली होगी, क्योंकि इसके सफल या असफल होने पर नासा की प्रतिष्ठा दाँव पर लगी हुई थी. पूरा समाचार यहाँ पर पढें.

सोमवार, अगस्त 08, 2005

कुत्ते का क्लोन

अब डॉली भेड़ के बाद कुत्ते का भी क्लोन आ गया है और इसको बनाया है दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने। देखना ये है कि ये क्लोनिंग केवल मज़े के लिये हो रही है या फिर इससे चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ अच्छा हो पाता है। और बात ये भी देखनी है कि ये कुत्ता भी बेचारा जिन्दा रहता है या फिर बीमारियों या विकृतियों का शिकार होकर मर जायेगा।
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शुक्रवार, जुलाई 08, 2005

भारतीय ग्रामीण अन्वे्षक

भारत के गांवों में बसते हैं आविष्कारक
उत्साहवर्धक लेख

शुक्रवार, जुलाई 01, 2005

हिमनादों का पिघलना

वैज्ञानिकों ने बताया है कि भारत के प्राचीन हिमनाद यानी ग्लेशियर इस सदी के अंत तक पिघल सकते हैं। ये वो हिमनाद हैं जिनसे कि गंगा नदी में पानी आता है। और अगर वैश्विक तापमान में वृद्धि अनुमान से ज़्यादा होती है तो ये और जल्दी हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार वैश्विक तापमान में वृद्धि का कारण कार्बन डाइ ऑक्साइड व अन्य गैसों का अत्यधिक मात्रा में उत्सर्जन है। ये जैसें सूरज की गर्मी को अपने अंदर रखती हैं और इससे पृथ्वी और वातावरण दोनों गर्म रहते हैं। इससे भारत के साथ नेपाल, पाकिस्तान और बाङग्लादेश भी प्रभावित हो सकते हैं।

हिमनादों का पिघलना एक चिन्ता का कारण है क्योंकि इससे लाखों करोड़ों किसानों व उनसे जुड़े अन्य लोगों की रोज़ी रोटी प्रभावित होगी, ऐसे लोग जो कि कृषि पर निर्भर हैं। हालांकि कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जन का अधिकांश भाग अमेरिका व चीन द्वारा उत्सर्जित किया जाता है, भारत भी पीछे नहीं है। भारत में टैम्पो जैसे कुख्यात वाहन इस समस्या को और विकराल बना रहे हैं। तापमान बढ़ने के साथ साथ धूलकणों और गैसों को श्वास के द्वारा अन्दर लिये जाने पर हृदय सम्बन्धी बीमारियां भी बढ़ेंगी।

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